Friday, 13 July 2018

सम्भालिये अपने चन्द्रमा को


चन्द्रमा हमारे मन का कारक ग्रह है । चन्द्रमा मनसो जातः । मन के कारक चंद्र से ही हमारे व्यक्तित्व का निर्माण होता है। यह अति संवेदनशील ग्रह है और इसका हमारे जीवन, मन - मस्तिष्क पर अत्यधिक प्रभावित पड़ता है | 

इसका का हमारी माता से सीधा सम्बन्ध होता है यदि कुंडली में यह अशुभ अवस्था में हो तो माता को कष्ट या स्वास्थ्य की परेशानी रहती है । जातक के दाम्पत्य सुख में कमीअशांति रहती है और वह अपने रिश्तों को सम्भाल नही पाता, प्रेम की कमी हो जाती है ।जातक को मानसिक तनावमन में घबराहट एवं तरह-तरह की शंका व भय पैदा होते हैं । अत्यधिक पीड़ित हो तो आत्महत्या करने तक के विचार मन में आने लगते हैं ।

यह कर्क राशि का स्वामी है, वृष राशी में उच्च का व वृश्चिक राशी में नीच का होता है | 

पुरुष कुंडली में चंद्र यदि छठे, आठवां अथवा बारहवें भाव में हो तो अधिक शुभ फलदायी नहीं होता । 

स्त्री कुंडली में चन्द्रमा यदि प्रथम, चतुर्थ, छठे, आठवें, नवें अथवा बारहवें भाव में हो तो 
अशुभ फल देता है 

कुंडली में चन्द्रमा आश्विनी, ज्येष्ठा, आश्लेषा, मघा, मूल और रेवती, इन नक्षत्रों में शुभ फल नही देता, इन नक्षत्रों को 'मूल संज्ञक' या 'गंडमूल नक्षत्र' कहा जाता है।

सूर्य और बुध, चन्‍द्रमा के अच्‍छे मित्र हैं, जबकि मंगल, गुरू, शुक्र एवं शनि सम है व चंद्रमा के लिए बुध शुभ है। जबकि चन्‍द्रमा स्‍वयं किसी भी अन्‍य ग्रह को अपना शत्रु नहीं मानता, हालांकि शनि व शुक्र, चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं और इसीलिए जब व्‍यक्ति की जन्‍म-कुण्‍डली के चन्‍द्रमा को शनि प्रभावित करता है, तो उसे शनी की ढैय्या  शनी की साढ़ेसातीके नाम से जाना जाता है।

जिस तरह से चंद्रमा किसी को अपना शत्रु नहींं मानता, उसी तरह से चन्‍द्रमा से प्रभावित व्‍यक्ति भी अपने जीवन में किसी को अपना शत्रु नहीं मानता, लेकिन फिर भी कई लोग उसे अपना शत्रु मानते हैं व उसे समय-समय पर तरह-तरह से नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी करते हैं।

चन्‍द्रमा, मनुष्‍य के शरीर में कफ प्रवृति तथा जल अथवा तरल (Liquid) का प्रतिनिधित्‍व करते हैं तथा शरीर के अंदर द्रव्‍यों की मात्रा, बल तथा बहाव को नियंत्रित करते हैं। इस कारण से चन्‍द्रमा प्रभावित व्‍यक्ति का वजन समय के साथ-साथ काफी अधि‍क बढ़ जाता है, साथ ही व्‍यक्ति धीरे-धीरे अधिक नींद लेने वाला व आलसी प्रवृति का बन जाता है।

कैसे होता चन्द्र खराब? : -

v घर का वायव्य कोण दूषित होने पर भी चन्द्र खराब हो जाता है।
v घर में जल का स्थान-दिशा यदि दूषित है तो भी चन्द्र मंदा फल देता है।
v पूर्वजों का अपमान करने और श्राद्ध कर्म नहीं करने से भी चन्द्र दूषित हो जाता है।
v माता का अपमान करने या उससे विवाद करने पर चन्द्र अशुभ प्रभाव देने लगता है।
v शरीर में जल यदि दूषित हो गया है तो भी चन्द्र का अशुभ प्रभाव पड़ने लगता है।
v गृह कलह करने और पारिवारिक सदस्य को धोखा देने से भी चन्द्र मंदा फल देता है।
v राहु, केतु या शनि के साथ होने से तथा उनकी दृष्टि चन्द्र पर पड़ने से चन्द्र खराब फल देने लगता है।
v चन्द्रमा के दोनों और यानि चन्द्रमा से दुसरे व बारहवें भाव में कोई ग्रह नही होने पर (राहू-केतु) के अलावा
v चन्द्रमा के दोनों और केवल पाप ग्रह होने पर
v केवल अशुभ दृष्टियां होने पर
v पाप दृष्टियाँ अधिक होने पर
v शनि, राहू – केतु से युति करने पर

उपाय - 
चंद्रमा को भगवान शिव ने धारण कर रखा हैं, इसलिए शिव की पूजा की जाए तो स्थितियां सुधर सकती हैं। इसके लिए सोमवार का व्रत करना, पूर्णिमा का व्रत करना, शंकर जी को दूध से स्नान कराना और सोमवार को सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए। अगर चंद्रमा बहुत ज्यादा खराब है तो शंकर जी के मंदिर में जाकर ‘ओम नम: शिवायएवं ऊं सों सोमाय नम:’ मंत्र का जाप करें। चंद्रमा को प्रसन्न करने के लिए चंद्रमा के इस मंत्र का भी जाप करें- ऊं श्रं श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:। इस मंत्र को 11 हजार बार जप करने से कुंडली में चंद्र की स्थिति में सुधार आता है। 
जप पूर्णिमा या शुक्ल पक्ष के सोमवार से शुरू करना चाहिए।
चन्द्रमाँ का दान वस्तु :चावल, दूध, चांदी, मोती, दही, मिश्री, श्वेत वस्त्र, श्वेत फूल या चन्दन. इन वस्तुओं का दान सोमवार के दिन सायंकाल में करना चाहिए. जिनकी कुंडली में चन्द्र अशुभ हो ऐसे लोग चंद्र की शुभता लेने के लिए माता, नानी, दादी, सास एवं इनके पद के समान वाली स्त्रियों का आशीर्वाद ले ||

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